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values | sanskrit stringlengths 49 133 | hindi_meaning stringlengths 62 469 | life_lesson stringclasses 51
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|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
bhagavad-gita-lifelesson | 1.1 | 1_1 | 1 | 1 | karma | धृतराष्ट्र उवाच
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय | धृतराष्ट्र ने कहा—हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छा वाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया? | जीवन के हर संघर्ष में पहला कदम सच्चाई और निष्पक्ष आत्म-निरीक्षण का होना चाहिए। | 🎧 Verse 1.1
First: Sanskrit chanting
धृतराष्ट्र उवाच
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय
🗣️ Hindi meaning
धृतराष्ट्र ने कहा—हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्रित, युद्ध की इच्छा वाले मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?
🌱 Life lesson
जीवन के हर संघर्ष में पहला कदम ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.2 | 1_2 | 1 | 2 | karma | सञ्जय उवाच
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा
आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत् | संजय ने कहा—उस समय राजा दुर्योधन ने व्यूह रचनायुक्त पाण्डवों की सेना को देखकर और द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन कहा। | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.2
First: Sanskrit chanting
सञ्जय उवाच
दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा
आचार्यमुपसंगम्य राजा वचनमब्रवीत्
🗣️ Hindi meaning
संजय ने कहा—उस समय राजा दुर्योधन ने व्यूह रचनायुक्त पाण्डवों की सेना को देखकर और द्रोणाचार्य के पास जाकर यह वचन कहा।
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व मे... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.3 | 1_3 | 1 | 3 | karma | पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता | हे आचार्य! आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डु पुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.3
First: Sanskrit chanting
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता
🗣️ Hindi meaning
हे आचार्य! आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न द्वारा व्यूहाकार खड़ी की हुई पाण्डु पुत्रों की इस बड़ी भारी सेना को देखिये |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.4 | 1_4 | 1 | 4 | karma | अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः | इस सेना में बड़े-बड़े धनुषों वाले तथा युद्ध में भीम और अर्जुन के समान शूरवीर युयुधान, विराट और महारथी द्रुपद भी हैं। | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.4
First: Sanskrit chanting
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः
🗣️ Hindi meaning
इस सेना में बड़े-बड़े धनुषों वाले तथा युद्ध में भीम और अर्जुन के समान शूरवीर युयुधान, विराट और महारथी द्रुपद भी हैं।
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.5 | 1_5 | 1 | 5 | karma | धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुंगवः | धृष्टकेतु, चेकितान, बलवान काशिराज, पुरुजित्, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य। | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.5
First: Sanskrit chanting
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुंगवः
🗣️ Hindi meaning
धृष्टकेतु, चेकितान, बलवान काशिराज, पुरुजित्, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य।
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.6 | 1_6 | 1 | 6 | karma | युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः | युधामन्यु, विक्रांत, उत्तमौजा, वीर्यवान् सौभद्र और द्रौपदी के पुत्र सभी महारथी हैं। और भी मेरे लिये जीवन की आशा त्याग देने वाले बहुत-से शूरवीर अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित और सब-के-सब युद्ध में चतुर हैं | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.6
First: Sanskrit chanting
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान्
सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः
🗣️ Hindi meaning
युधामन्यु, विक्रांत, उत्तमौजा, वीर्यवान् सौभद्र और द्रौपदी के पुत्र सभी महारथी हैं। और भी मेरे लिये जीवन की आशा त्याग देने वाले बहुत-से शूरवीर अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.7 | 1_7 | 1 | 7 | karma | अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते | हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अपने पक्ष में भी जो प्रधान हैं, उनको आप समझ लीजिये। आपकी जानकारी के लिये मेरी सेना के जो-जो सेनापति हैं, उनको बतलाता हूँ| | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.7
First: Sanskrit chanting
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते
🗣️ Hindi meaning
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! अपने पक्ष में भी जो प्रधान हैं, उनको आप समझ लीजिये। आपकी जानकारी के लिये मेरी सेना के जो-जो सेनापति हैं, उनको बतलाता हूँ|
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.8 | 1_8 | 1 | 8 | karma | भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च | आप—द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्राम विजयी कृपाचार्य तथा वैसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सौमदत पुत्र भूरिश्रवा | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.8
First: Sanskrit chanting
भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च
🗣️ Hindi meaning
आप—द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्राम विजयी कृपाचार्य तथा वैसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सौमदत पुत्र भूरिश्रवा |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.9 | 1_9 | 1 | 9 | karma | अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः | और भी मेरे लिये जीवन की आशा त्याग देने वाले बहुत-से शूरवीर अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित और सब-के-सब युद्ध में चतुर हैं | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.9
First: Sanskrit chanting
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः
🗣️ Hindi meaning
और भी मेरे लिये जीवन की आशा त्याग देने वाले बहुत-से शूरवीर अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित और सब-के-सब युद्ध में चतुर हैं |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वं... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.10 | 1_10 | 1 | 10 | karma | अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम् | भीष्म पितामह द्वारा रक्षित हमारी वह सेना सब प्रकार से अजेय है और भीम द्वारा रक्षित इन लोगों की यह सेना जीतने में सुगम है | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.10
First: Sanskrit chanting
अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम्
🗣️ Hindi meaning
भीष्म पितामह द्वारा रक्षित हमारी वह सेना सब प्रकार से अजेय है और भीम द्वारा रक्षित इन लोगों की यह सेना जीतने में सुगम है |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व म... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.11 | 1_11 | 1 | 11 | karma | अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि | इसलिए सब मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह स्थित रहते हुए आप लोग सभी निःसन्देह भीष्म पितामह की ही सब ओर से रक्षा करें | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.11
First: Sanskrit chanting
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि
🗣️ Hindi meaning
इसलिए सब मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह स्थित रहते हुए आप लोग सभी निःसन्देह भीष्म पितामह की ही सब ओर से रक्षा करें |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने न... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.12 | 1_12 | 1 | 12 | karma | तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान् | कौरवों में वृद्ध बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने उस दुर्योधन के हृदयमें हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वर से सिंह की दहाड़ के समान गरजकर शंख बजाया | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.12
First: Sanskrit chanting
तस्य सञ्जनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः
सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान्
🗣️ Hindi meaning
कौरवों में वृद्ध बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने उस दुर्योधन के हृदयमें हर्ष उत्पन्न करते हुए उच्च स्वर से सिंह की दहाड़ के समान गरजकर शंख बजाया |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों औ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.13 | 1_13 | 1 | 13 | karma | ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत् | इसके पश्चात शंख और नगारे तथा ढोल, मृदंग और नरसिंधे आदि बाजे एक साथ ही बज उठे। उनका वह शब्द बड़ा भयंकर हुआ | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.13
First: Sanskrit chanting
ततः शङ्खाश्च भेर्यश्च पणवानकगोमुखाः
सहसैवाभ्यहन्यन्त स शब्दस्तुमुलोऽभवत्
🗣️ Hindi meaning
इसके पश्चात शंख और नगारे तथा ढोल, मृदंग और नरसिंधे आदि बाजे एक साथ ही बज उठे। उनका वह शब्द बड़ा भयंकर हुआ |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नै... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.14 | 1_14 | 1 | 14 | karma | ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः | इसके अनन्तर सफेद घोड़ों से युक्त उत्तम रथ में बैठे हुए श्रीकृष्ण महाराज और अर्जुन ने भी अलौकिक शंख बजाये | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.14
First: Sanskrit chanting
ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ
माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः
🗣️ Hindi meaning
इसके अनन्तर सफेद घोड़ों से युक्त उत्तम रथ में बैठे हुए श्रीकृष्ण महाराज और अर्जुन ने भी अलौकिक शंख बजाये |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.15 | 1_15 | 1 | 15 | karma | पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः | श्रीकृष्ण महाराज ने पाञ्जन्य नामक, अर्जुन ने देवदत्त नामक और भयानक कर्म वाले भीमसेन ने पौण्ड्र नामक महाशंख बजाया | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.15
First: Sanskrit chanting
पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः
🗣️ Hindi meaning
श्रीकृष्ण महाराज ने पाञ्जन्य नामक, अर्जुन ने देवदत्त नामक और भयानक कर्म वाले भीमसेन ने पौण्ड्र नामक महाशंख बजाया |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.16 | 1_16 | 1 | 16 | karma | अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ | कुंती पुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्त विजय नामक और नकूल तथा सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.16
First: Sanskrit chanting
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ
🗣️ Hindi meaning
कुंती पुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्त विजय नामक और नकूल तथा सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.17 | 1_17 | 1 | 17 | karma | काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः | श्रेष्ठ धनुष वाले काशिराज और महारथी शिखण्डी एवं धृष्टद्युम्न तथा राजा विराट और अजेय सात्यकि, | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.17
First: Sanskrit chanting
काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः
धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः
🗣️ Hindi meaning
श्रेष्ठ धनुष वाले काशिराज और महारथी शिखण्डी एवं धृष्टद्युम्न तथा राजा विराट और अजेय सात्यकि,
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.18 | 1_18 | 1 | 18 | karma | द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते
सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक् | राजा द्रुपद एवं द्रौपदी के पाँचों पुत्र और बड़ी भुजावाले सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु—इन सभी ने, हे राजन्! सब और से अलग-अलग शंख बजाये | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.18
First: Sanskrit chanting
द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते
सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक्
🗣️ Hindi meaning
राजा द्रुपद एवं द्रौपदी के पाँचों पुत्र और बड़ी भुजावाले सुभद्रा पुत्र अभिमन्यु—इन सभी ने, हे राजन्! सब और से अलग-अलग शंख बजाये |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्व... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.19 | 1_19 | 1 | 19 | karma | स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलोऽभ्यनुनादयन् (or लोव्यनु) | और उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गूँजाते हुए धार्तराष्ट्रों के यानी आपके पक्ष वालों के हृदय विदीर्ण कर दिये | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.19
First: Sanskrit chanting
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्
नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलोऽभ्यनुनादयन् (or लोव्यनु)
🗣️ Hindi meaning
और उस भयानक शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गूँजाते हुए धार्तराष्ट्रों के यानी आपके पक्ष वालों के हृदय विदीर्ण कर दिये |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.20 | 1_20 | 1 | 20 | karma | अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः
प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः
हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते | अथ व्यवस्थित धार्तराष्ट्रों को कपिध्वज (अर्जुन) ने देखा, जब वे शस्त्रों से सुसज्जित हो गए, तब धनुष उठाकर पाण्डव ने युद्ध की तैयारी की। हे राजन् ! इसके बाद कपिध्वज अर्जुन ने मोर्चा बाँधकर डटे हुए धृतराष्ट्र-सम्बन्धियों को देखकर, उस शत्रु चलने की तैयारी के समय धनुष उठाकर हृषीकेश श्रीकृष्ण महाराज से यह वचन कहा—हे अच्युत !... | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.20
First: Sanskrit chanting
अथ व्यवस्थितान्दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान् कपिध्वजः
प्रवृत्ते शस्त्रसम्पाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः
हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते
🗣️ Hindi meaning
अथ व्यवस्थित धार्तराष्ट्रों को कपिध्वज (अर्जुन) ने देखा, जब वे शस्त्रों से सुसज्जित हो गए, तब धनुष उठाकर पाण्डव ने युद्ध की तैयारी की। हे... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.21 | 1_21 | 1 | 21 | karma | अर्जुन उवाच
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत | तब हे पृथिवीपति (कृष्ण), हृषीकेश (कृष्ण) ने कहा, हे अच्युत, सेनाओं के मध्य में मेरा रथ स्थापित करो। और जब तक कि मैं युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इन विपक्षी योद्धाओं को भली प्रकार देख लूँ कि इस युद्ध रूप व्यापार में मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना योग्य है, तब तक उसे खड़ा रखिये | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.21
First: Sanskrit chanting
अर्जुन उवाच
सेनयोरुभयोर्मध्ये रथं स्थापय मेऽच्युत
🗣️ Hindi meaning
तब हे पृथिवीपति (कृष्ण), हृषीकेश (कृष्ण) ने कहा, हे अच्युत, सेनाओं के मध्य में मेरा रथ स्थापित करो। और जब तक कि मैं युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इन विपक्षी योद्धाओं को भली प्रकार देख लूँ कि इस युद्ध... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.22 | 1_22 | 1 | 22 | karma | यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे | और जब तक कि मैं युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इन विपक्षी योद्धाओं को भली प्रकार देख लूँ कि इस युद्ध रूप व्यापार में मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना योग्य है, तब तक उसे खड़ा रखिये | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.22
First: Sanskrit chanting
यावदेतान्निरीक्षेऽहं योद्धुकामानवस्थितान्
कैर्मया सह योद्धव्यमस्मिन् रणसमुद्यमे
🗣️ Hindi meaning
और जब तक कि मैं युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इन विपक्षी योद्धाओं को भली प्रकार देख लूँ कि इस युद्ध रूप व्यापार में मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना योग्य है, तब तक उसे खड... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.23 | 1_23 | 1 | 23 | karma | योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः | दुर्बुद्धि दुर्योधन का युद्ध में हित चाहने वाले जो-जो ये राजा लोग इस सेना में आये हैं, इन युद्ध करने वालों को मैं देखूँगा | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.23
First: Sanskrit chanting
योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः
धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः
🗣️ Hindi meaning
दुर्बुद्धि दुर्योधन का युद्ध में हित चाहने वाले जो-जो ये राजा लोग इस सेना में आये हैं, इन युद्ध करने वालों को मैं देखूँगा |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.24 | 1_24 | 1 | 24 | karma | सञ्जय उवाच
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत
सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् | सज्जय ने कहा—हे धृतराष्ट्र! अर्जुन द्वारा इस प्रकार कहे हुए महाराज श्रीकृष्ण चन्द्र ने दोनों सेनाओं के बीच में भीष्म और द्रोणाचार्य के सामने तथा सम्पूर्ण राजाओं के सामने उत्तम रथ को खड़ा करके इस प्रकार कहा कि हे पार्थ! युद्ध के लिये जुटे हुए इन कौरवों को देख | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.24
First: Sanskrit chanting
सञ्जय उवाच
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत
सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्
🗣️ Hindi meaning
सज्जय ने कहा—हे धृतराष्ट्र! अर्जुन द्वारा इस प्रकार कहे हुए महाराज श्रीकृष्ण चन्द्र ने दोनों सेनाओं के बीच में भीष्म और द्रोणाचार्य के सामने तथा सम्पूर्ण राजाओं के सामने उत्तम रथ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.25 | 1_25 | 1 | 25 | karma | भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्
उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति | भीष्म और द्रोणाचार्य के प्रधान होकर और अन्य सब राजाओं के सामने भगवान श्रीकृष्ण ने कहा— हे पार्थ! देख इन एकत्र हुए हुए कौरवों को। | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.25
First: Sanskrit chanting
भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्
उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति
🗣️ Hindi meaning
भीष्म और द्रोणाचार्य के प्रधान होकर और अन्य सब राजाओं के सामने भगवान श्रीकृष्ण ने कहा— हे पार्थ! देख इन एकत्र हुए हुए कौरवों को।
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.26 | 1_26 | 1 | 26 | karma | तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितॄनथ पितामहान्
आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा | इसके बाद पृथापुत्र अर्जुन ने उन दोनों ही सेनाओं में स्थित ताऊ-चाचों को, दादों परदादों को, गुरुओं को, मामाओं को, भाइयों को, पुत्रों को, पौत्रों को तथा मित्रों को, ससुरों को और सुहृदों को भी देखा ।। २६ और २७वें का पूर्वार्ध ।। | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.26
First: Sanskrit chanting
तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितॄनथ पितामहान्
आचार्यान्मातुलान्भ्रातॄन्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा
🗣️ Hindi meaning
इसके बाद पृथापुत्र अर्जुन ने उन दोनों ही सेनाओं में स्थित ताऊ-चाचों को, दादों परदादों को, गुरुओं को, मामाओं को, भाइयों को, पुत्रों को, पौत्रों को तथा मित्रों को, ससुरों... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.27 | 1_27 | 1 | 27 | karma | श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान् | उन उपस्थित सम्पूर्ण बन्धुओं को देखकर वह कुत्तीपुत्र अर्जुन अत्यन्त करुणा से युक्त होकर शोक करते हुए यह बचन ने कहा ।। २७वेंका उत्तरार्ध और २८वेंका पूर्वार्ध ।। | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.27
First: Sanskrit chanting
श्वशुरान्सुहृदश्चैव सेनयोरुभयोरपि
तान्समीक्ष्य स कौन्तेयः सर्वान्बन्धूनवस्थितान्
🗣️ Hindi meaning
उन उपस्थित सम्पूर्ण बन्धुओं को देखकर वह कुत्तीपुत्र अर्जुन अत्यन्त करुणा से युक्त होकर शोक करते हुए यह बचन ने कहा ।। २७वेंका उत्तरार्ध और २८वेंका पूर्वार्ध ।।
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कठिन प... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.29 | 1_29 | 1 | 29 | karma | सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते | मेरा मुख सूखा जा रहा है तथा मेरे शरीर में कंप एवं रोमांच हो रहा है। | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.29
First: Sanskrit chanting
सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति
वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते
🗣️ Hindi meaning
मेरा मुख सूखा जा रहा है तथा मेरे शरीर में कंप एवं रोमांच हो रहा है।
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.28 | 1_28 | 1 | 28 | karma | कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत्
अर्जुन उवाच
दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम् | अर्जुन ने कहा—हे कृष्ण ! युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इस स्वजन समुदाय को देखकर मेरे अंग शिथिल हुए जा रहे हैं और मुख सूखा जा रहा है तथा मेरे शरीर में कम्प एवं रोमाञ्च हो रहा है ।। २८वेंका उत्तरार्ध और २६ ।। | अत्यधिक मोह और भ्रम मनुष्य के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं। | 🎧 Verse 1.28
First: Sanskrit chanting
कृपया परयाविष्टो विषीदन्निदमब्रवीत्
अर्जुन उवाच
दृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम्
🗣️ Hindi meaning
अर्जुन ने कहा—हे कृष्ण ! युद्ध क्षेत्र में डटे हुए युद्ध के अभिलाषी इस स्वजन समुदाय को देखकर मेरे अंग शिथिल हुए जा रहे हैं और मुख सूखा जा रहा है तथा मेरे शरीर में कम्प ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.30 | 1_30 | 1 | 30 | karma | गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते
न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः | हाथ से गाण्डीव धनुष गिर रहा है और त्वचा भी बहुत जल रही है तथा मेरा मन भ्रमित-सा हो रहा है, इसलिए मैं खड़ा रहने को भी समर्थ नहीं हूँ | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.30
First: Sanskrit chanting
गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते
न च शक्नोम्यवस्थातुं भ्रमतीव च मे मनः
🗣️ Hindi meaning
हाथ से गाण्डीव धनुष गिर रहा है और त्वचा भी बहुत जल रही है तथा मेरा मन भ्रमित-सा हो रहा है, इसलिए मैं खड़ा रहने को भी समर्थ नहीं हूँ |
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.31 | 1_31 | 1 | 31 | karma | निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे | हे केशव! मैं लक्ष्णों को भी विपरीत ही देख रहा हूँ तथा युद्ध में स्वजन-समुदाय को मारकर कल्याण भी नहीं देखता | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.31
First: Sanskrit chanting
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे
🗣️ Hindi meaning
हे केशव! मैं लक्ष्णों को भी विपरीत ही देख रहा हूँ तथा युद्ध में स्वजन-समुदाय को मारकर कल्याण भी नहीं देखता |
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.32 | 1_32 | 1 | 32 | karma | न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च
किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा | हे कृष्ण ! मैं न तो विजय चाहता हूँ और न राज्य तथा सुखों को ही । हे गोविन्द ! हमें ऐसे राज्य से क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगों से और जीवन से भी क्या लाभ है ? | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.32
First: Sanskrit chanting
न काङ्क्षे विजयं कृष्ण न च राज्यं सुखानि च
किं नो राज्येन गोविन्द किं भोगैर्जीवितेन वा
🗣️ Hindi meaning
हे कृष्ण ! मैं न तो विजय चाहता हूँ और न राज्य तथा सुखों को ही । हे गोविन्द ! हमें ऐसे राज्य से क्या प्रयोजन है अथवा ऐसे भोगों से और जीवन से भी क्या लाभ है ? |
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... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.33 | 1_33 | 1 | 33 | karma | येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च | हमें जिनके लिये राज्य, भोग और सुखादि अभिष्ट हैं; वे ही ये सब धन और जीवन की आशा को त्याग कर युद्ध में खड़े हैं| | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.33
First: Sanskrit chanting
येषामर्थे काङ्क्षितं नो राज्यं भोगाः सुखानि च
त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च
🗣️ Hindi meaning
हमें जिनके लिये राज्य, भोग और सुखादि अभिष्ट हैं; वे ही ये सब धन और जीवन की आशा को त्याग कर युद्ध में खड़े हैं|
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व मे... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.34 | 1_34 | 1 | 34 | karma | आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा | गुरुजन, ताऊ-चाचा, लड़के और उसी प्रकार दादा, मामा, ससुर, पौत्र, साले तथा और भी सम्बन्धी लोग हैं| | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.34
First: Sanskrit chanting
आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः
मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा
🗣️ Hindi meaning
गुरुजन, ताऊ-चाचा, लड़के और उसी प्रकार दादा, मामा, ससुर, पौत्र, साले तथा और भी सम्बन्धी लोग हैं|
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.35 | 1_35 | 1 | 35 | karma | एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते | हे मधुसूदन! मुझे मारने पर भी अथवा तीनों लोकों के राज्य के लिये भी मैं इन सबको मारना नहीं चाहता; फिर पृथ्वी के लिये तो कहना ही क्या है?| | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.35
First: Sanskrit chanting
एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते
🗣️ Hindi meaning
हे मधुसूदन! मुझे मारने पर भी अथवा तीनों लोकों के राज्य के लिये भी मैं इन सबको मारना नहीं चाहता; फिर पृथ्वी के लिये तो कहना ही क्या है?|
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्म... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.36 | 1_36 | 1 | 36 | karma | निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः | हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी? इन आततायियों को मारकर तो हमें पाप ही लगेगा| | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.36
First: Sanskrit chanting
निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन
पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः
🗣️ Hindi meaning
हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या प्रसन्नता होगी? इन आततायियों को मारकर तो हमें पाप ही लगेगा|
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कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबरा... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.37 | 1_37 | 1 | 37 | karma | तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव | अतएव हे माधव! अपने ही बान्धव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारने के लिये हम योग्य नहीं हैं; क्योंकि अपने ही कुटुम्ब को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?| | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.37
First: Sanskrit chanting
तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्
स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव
🗣️ Hindi meaning
अतएव हे माधव! अपने ही बान्धव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारने के लिये हम योग्य नहीं हैं; क्योंकि अपने ही कुटुम्ब को मारकर हम कैसे सुखी होंगे?|
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कठिन परिस्थिति... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.38 | 1_38 | 1 | 38 | karma | यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम् | यद्यपि लोभ से भ्रष्टचित हुए ये लोग कुल के नाश से उत्पन्न दोष को और मित्रों से विरोध करने में पाप को नहीं देखते, | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.38
First: Sanskrit chanting
यद्यप्येते न पश्यन्ति लोभोपहतचेतसः
कुलक्षयकृतं दोषं मित्रद्रोहे च पातकम्
🗣️ Hindi meaning
यद्यपि लोभ से भ्रष्टचित हुए ये लोग कुल के नाश से उत्पन्न दोष को और मित्रों से विरोध करने में पाप को नहीं देखते,
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपन... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.39 | 1_39 | 1 | 39 | karma | कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन | तो भी हे जनार्दन! कुल के नाश से उत्पन्न दोष को जानने वाले हम लोगों को इस पाप से हटने के लिये क्यों नहीं विचार करना चाहिए। | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.39
First: Sanskrit chanting
कथं न ज्ञेयमस्माभिः पापादस्मान्निवर्तितुम्
कुलक्षयकृतं दोषं प्रपश्यद्भिर्जनार्दन
🗣️ Hindi meaning
तो भी हे जनार्दन! कुल के नाश से उत्पन्न दोष को जानने वाले हम लोगों को इस पाप से हटने के लिये क्यों नहीं विचार करना चाहिए।
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.40 | 1_40 | 1 | 40 | karma | कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत | कुल के नाश से सनातन कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, धर्म के नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.40
First: Sanskrit chanting
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः
धर्मे नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत
🗣️ Hindi meaning
कुल के नाश से सनातन कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, धर्म के नाश हो जाने पर सम्पूर्ण कुल में पाप भी बहुत फैल जाता है |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के ब... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.41 | 1_41 | 1 | 41 | karma | अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः | हे कृष्ण! पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.41
First: Sanskrit chanting
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः
स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः
🗣️ Hindi meaning
हे कृष्ण! पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय! स्त्रियों के दूषित हो जाने पर वर्णसंकर उत्पन्न होता है |
🌱 Life lesson
कठिन प... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.42 | 1_42 | 1 | 42 | karma | सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः | वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जाने के लिये ही होता है। लुप्त हुई पिण्ड और जल की क्रिया वाले अर्थात् श्रद्धा और तर्पण से वंचित इनके पितर लोग भी अधोगति को प्राप्त होते हैं | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.42
First: Sanskrit chanting
सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य च
पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः
🗣️ Hindi meaning
वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जाने के लिये ही होता है। लुप्त हुई पिण्ड और जल की क्रिया वाले अर्थात् श्रद्धा और तर्पण से वंचित इनके पितर लोग भी अधोगति को प्राप्त होते हैं |... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.43 | 1_43 | 1 | 43 | karma | दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः | इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.43
First: Sanskrit chanting
दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः
उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः
🗣️ Hindi meaning
इन वर्णसंकरकारक दोषों से कुलघातियों के सनातन कुल-धर्म और जाति-धर्म नष्ट हो जाते हैं |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य औ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.44 | 1_44 | 1 | 44 | karma | उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन
नरके नियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम (or नरकेऽनियतं) | हे जनार्दन ! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चित काल तक नरक में वास होता है, ऐसा हम सुनते आये हैं | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.44
First: Sanskrit chanting
उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन
नरके नियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम (or नरकेऽनियतं)
🗣️ Hindi meaning
हे जनार्दन ! जिनका कुल-धर्म नष्ट हो गया है, ऐसे मनुष्यों का अनिश्चित काल तक नरक में वास होता है, ऐसा हम सुनते आये हैं |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.45 | 1_45 | 1 | 45 | karma | अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः | हा ! शोक ! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान् पाप करने को तैयार हो गये हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिये उद्यत हो गये हैं | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.45
First: Sanskrit chanting
अहो बत महत्पापं कर्तुं व्यवसिता वयम्
यद्राज्यसुखलोभेन हन्तुं स्वजनमुद्यताः
🗣️ Hindi meaning
हा ! शोक ! हम लोग बुद्धिमान होकर भी महान् पाप करने को तैयार हो गये हैं, जो राज्य और सुख के लोभ से स्वजनों को मारने के लिये उद्यत हो गये हैं |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्म... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.46 | 1_46 | 1 | 46 | karma | यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत् | यदि मुझ शस्त्ररहित एवं सामना न करने वाले को शस्त्र हाथ में लिये हुए धृतराष्ट्र के पुत्र रण में मार डालें तो वह मारना भी मेरे लिये अधिक कल्याणकारक होगा | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.46
First: Sanskrit chanting
यदि मामप्रतीकारमशस्त्रं शस्त्रपाणयः
धार्तराष्ट्रा रणे हन्युस्तन्मे क्षेमतरं भवेत्
🗣️ Hindi meaning
यदि मुझ शस्त्ररहित एवं सामना न करने वाले को शस्त्र हाथ में लिये हुए धृतराष्ट्र के पुत्र रण में मार डालें तो वह मारना भी मेरे लिये अधिक कल्याणकारक होगा |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 1.47 | 1_47 | 1 | 47 | karma | सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वार्जुनः सङ्ख्ये रथोपस्थ उपाविशत्
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः | संजय ने कहा— रणभूमि में शोक से उद्विग्न मन वाला अर्जुन इस प्रकार कहकर वाणसहित धनुष को त्यागकर रथ के पीछे भाग में बैठ गया | | कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद्व में घबराने के बजाय अपने नैतिक कर्तव्य और सत्य को पहचानना आवश्यक है। | 🎧 Verse 1.47
First: Sanskrit chanting
सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वार्जुनः सङ्ख्ये रथोपस्थ उपाविशत्
विसृज्य सशरं चापं शोकसंविग्नमानसः
🗣️ Hindi meaning
संजय ने कहा— रणभूमि में शोक से उद्विग्न मन वाला अर्जुन इस प्रकार कहकर वाणसहित धनुष को त्यागकर रथ के पीछे भाग में बैठ गया |
🌱 Life lesson
कठिन परिस्थितियों और भावनात्मक द्वंद... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.1 | 2_1 | 2 | 1 | karma | सञ्जय उवाच
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः | सज्जय ने कहा—उस प्रकार करुणा से व्याप्त और आँसुओं से पूर्ण तथा व्याकुल नेत्रों वाले शोकयुक्त उस अर्जुन के प्रति भगवान् मधुसूदन ने यह वचन कहा| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.1
First: Sanskrit chanting
सञ्जय उवाच
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः
🗣️ Hindi meaning
सज्जय ने कहा—उस प्रकार करुणा से व्याप्त और आँसुओं से पूर्ण तथा व्याकुल नेत्रों वाले शोकयुक्त उस अर्जुन के प्रति भगवान् मधुसूदन ने यह वचन कहा|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.2 | 2_2 | 2 | 2 | karma | श्रीभगवानुवाच
कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन | श्रीभगवान् ने कहा—हे अर्जुन! तुझे इस असमय में यह मोह किस हेतु से प्राप्त हुआ? क्योंकि न तो यह श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा आचरण है, न स्वर्ग को देने वाला है और न कीर्तिको करने वाला ही है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.2
First: Sanskrit chanting
श्रीभगवानुवाच
कुतस्त्वा कश्मलमिदं विषमे समुपस्थितम्
अनार्यजुष्टमस्वर्ग्यमकीर्तिकरमर्जुन
🗣️ Hindi meaning
श्रीभगवान् ने कहा—हे अर्जुन! तुझे इस असमय में यह मोह किस हेतु से प्राप्त हुआ? क्योंकि न तो यह श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा आचरण है, न स्वर्ग को देने वाला है और न कीर्तिको करने वाला ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.3 | 2_3 | 2 | 3 | karma | क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप | इसलिए हे अर्जुन! नपुंसकता को मत प्राप्त हो, तुझमें यह उचित नहीं जान पड़ती। हे परन्तप! हृदय की तुच्छ दुर्बलता को त्याग कर युद्ध के लिये खड़ा हो जा | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.3
First: Sanskrit chanting
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप
🗣️ Hindi meaning
इसलिए हे अर्जुन! नपुंसकता को मत प्राप्त हो, तुझमें यह उचित नहीं जान पड़ती। हे परन्तप! हृदय की तुच्छ दुर्बलता को त्याग कर युद्ध के लिये खड़ा हो जा |
🌱 Life lesson
परिणाम... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.4 | 2_4 | 2 | 4 | karma | अर्जुन उवाच
कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन
इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन | अर्जुन ने कहा— हे मधुसूदन! मैं रणभूमि में किस प्रकार वाणों से भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य के विरुद्ध लड़ूँगा? क्योंकि हे अरिसूदन! वे दोनों ही पूजनीय हैं| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.4
First: Sanskrit chanting
अर्जुन उवाच
कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन
इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन
🗣️ Hindi meaning
अर्जुन ने कहा— हे मधुसूदन! मैं रणभूमि में किस प्रकार वाणों से भीष्म पितामह और द्रोणाचार्य के विरुद्ध लड़ूँगा? क्योंकि हे अरिसूदन! वे दोनों ही पूजनीय हैं|
🌱 Life lesson
परिण... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.5 | 2_5 | 2 | 5 | karma | गुरूनहत्वा हि महानुभावान्श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके
हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैवभुञ्जीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान् | इसलिए इन महानुभाव गुरुओं को न मारकर मैं इस लोक में भिक्षा का अन्न भी खाना कल्याणकारक समझता हूँ। क्योंकि गुरुओं को मारकर भी इस लोक में रुधिर से सने हुए अर्थ और कामरूप भोगों को ही तो भोगूँगा| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.5
First: Sanskrit chanting
गुरूनहत्वा हि महानुभावान्श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके
हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैवभुञ्जीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान्
🗣️ Hindi meaning
इसलिए इन महानुभाव गुरुओं को न मारकर मैं इस लोक में भिक्षा का अन्न भी खाना कल्याणकारक समझता हूँ। क्योंकि गुरुओं को मारकर भी इस लोक में रुधिर से सने ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.6 | 2_6 | 2 | 6 | karma | न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयोयद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः
यानेव हत्वा न जिजीविषामस्-तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः | हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिये युद्ध करना और न करना—इन दोनों में से कौन-सा श्रेष्ठ है, अथवा यह भी नहीं जानते कि उन्हें हम जीतेंगे या हमको वे जीतेंगे। और जिन को मारकर हम जीना भी नहीं चाहते, वे ही हमारे आत्मीय धृतराष्ट्र के पुत्र हमारे मुकाबले में खड़े हैं | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.6
First: Sanskrit chanting
न चैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयोयद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः
यानेव हत्वा न जिजीविषामस्-तेऽवस्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः
🗣️ Hindi meaning
हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिये युद्ध करना और न करना—इन दोनों में से कौन-सा श्रेष्ठ है, अथवा यह भी नहीं जानते कि उन्हें हम जीतेंगे या हमको वे जीत... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.7 | 2_7 | 2 | 7 | karma | कार्पण्यदोषोपहतस्वभावःपृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः
यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मेशिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम् | इसलिए कायरता रूप दोष से उपहत हुए स्वभाव वाला तथा धर्म के विषय में मोहित चित हुआ मैं आपसे पूछता हूँ कि जो साधन निश्चित कल्याण कारक हो, वह मेरे लिये कहिये; क्योंकि मैं आपका शिष्य हूँ, इसलिए आपके शरण हुए मुझको शिक्षा दीजिये| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.7
First: Sanskrit chanting
कार्पण्यदोषोपहतस्वभावःपृच्छामि त्वां धर्मसम्मूढचेताः
यच्छ्रेयः स्यान्निश्चितं ब्रूहि तन्मेशिष्यस्तेऽहं शाधि मां त्वां प्रपन्नम्
🗣️ Hindi meaning
इसलिए कायरता रूप दोष से उपहत हुए स्वभाव वाला तथा धर्म के विषय में मोहित चित हुआ मैं आपसे पूछता हूँ कि जो साधन निश्चित कल्याण कारक हो, व... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.8 | 2_8 | 2 | 8 | karma | न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम्
अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धंराज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम् | क्योंकि भूमि में निःस्फुटक, धन-धान्य सम्पत्र राज्य और देवताओं के स्वामीपने को प्राप्त होकर भी मैं उस उपाय को नहीं देखता हूँ, जो मेरी इन्द्रियों के सुखाने वाले शोक को दूर कर सके| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.8
First: Sanskrit chanting
न हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम्
अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धंराज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम्
🗣️ Hindi meaning
क्योंकि भूमि में निःस्फुटक, धन-धान्य सम्पत्र राज्य और देवताओं के स्वामीपने को प्राप्त होकर भी मैं उस उपाय को नहीं देखता हूँ, जो मेरी इन्द्रियों के सुखाने व... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.9 | 2_9 | 2 | 9 | karma | सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप
न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह | सज्जय ने कहा—हे राजन! निःश्रा को जीतने वाले अर्जुन अन्तर्मी श्रीकृष्ण महाराज के प्रति इस प्रकार कहकर फिर श्रीगोविन्द भगवान् से 'युद्ध नहीं करूँगा' यह स्पष्ट कहकर चुप हो गये | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.9
First: Sanskrit chanting
सञ्जय उवाच
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप
न योत्स्य इति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह
🗣️ Hindi meaning
सज्जय ने कहा—हे राजन! निःश्रा को जीतने वाले अर्जुन अन्तर्मी श्रीकृष्ण महाराज के प्रति इस प्रकार कहकर फिर श्रीगोविन्द भगवान् से 'युद्ध नहीं करूँगा' यह स्पष्ट कहकर चुप हो गय... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.10 | 2_10 | 2 | 10 | karma | तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत
सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः | हे भरतवंशी धृतराष्ट्र! अन्तर्व्यापी श्रीकृष्ण महाराज ने दोनों सेनाओं के बीच शोक करते हुए उस अर्जुन को हँसते हुए ये वचन ने कहा| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.10
First: Sanskrit chanting
तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत
सेनयोरुभयोर्मध्ये विषीदन्तमिदं वचः
🗣️ Hindi meaning
हे भरतवंशी धृतराष्ट्र! अन्तर्व्यापी श्रीकृष्ण महाराज ने दोनों सेनाओं के बीच शोक करते हुए उस अर्जुन को हँसते हुए ये वचन ने कहा|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.11 | 2_11 | 2 | 11 | karma | श्रीभगवानुवाच
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः | श्रीभगवान ने कहा – हे अर्जुन! तू न शोक करने योग्य मनुष्यों के लिये शोक करता है और पण्डितों के से वचनों को कहता है; परंतु जिनके प्राण चले गये हैं, उनके लिये और जिनके प्राण नहीं गये हैं, उनके लिये भी पण्डितजन शोक नहीं करते | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.11
First: Sanskrit chanting
श्रीभगवानुवाच
अशोच्यानन्वशोचस्त्वं प्रज्ञावादांश्च भाषसे
गतासूनगतासूंश्च नानुशोचन्ति पण्डिताः
🗣️ Hindi meaning
श्रीभगवान ने कहा – हे अर्जुन! तू न शोक करने योग्य मनुष्यों के लिये शोक करता है और पण्डितों के से वचनों को कहता है; परंतु जिनके प्राण चले गये हैं, उनके लिये और जिनके प्र... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.12 | 2_12 | 2 | 12 | karma | न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम् | न तो ऐसा ही है कि मैं किसी काल में नहीं था या तू नहीं था अथवा ये राजा लोग नहीं थे और न ऐसा ही है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.12
First: Sanskrit chanting
न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः
न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्
🗣️ Hindi meaning
न तो ऐसा ही है कि मैं किसी काल में नहीं था या तू नहीं था अथवा ये राजा लोग नहीं थे और न ऐसा ही है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.13 | 2_13 | 2 | 13 | karma | देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति | जैसे जीवात्मा की इस देह में बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है, वैसे ही अन्य शरीर की प्राप्ति होती है; उस विषय में धीरो पुरुष मोहित नहीं होता | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.13
First: Sanskrit chanting
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति
🗣️ Hindi meaning
जैसे जीवात्मा की इस देह में बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है, वैसे ही अन्य शरीर की प्राप्ति होती है; उस विषय में धीरो पुरुष मोहित नहीं होता |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता क... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.14 | 2_14 | 2 | 14 | karma | मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत | हे कुन्तीपुत्र ! सर्दी-गर्मी और सुख — दुःख को देने वाले इन्द्रिय और विषयों के संयोग तो उत्पत्ति, विनाशशील और अनित्य हैं; इसलिए हे भारत ! उनको तू सहन कर | | सुख और दुःख सर्दी-गर्मी की तरह आते-जाते रहते हैं; उन्हें समभाव और धैर्य से सहन करना सीखें। | 🎧 Verse 2.14
First: Sanskrit chanting
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत
🗣️ Hindi meaning
हे कुन्तीपुत्र ! सर्दी-गर्मी और सुख — दुःख को देने वाले इन्द्रिय और विषयों के संयोग तो उत्पत्ति, विनाशशील और अनित्य हैं; इसलिए हे भारत ! उनको तू सहन कर |
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सुख और द... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.15 | 2_15 | 2 | 15 | karma | यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते | क्योंकि हे पुरुष श्रेष्ठ ! दुःख-सुख को समान समझने वाले जिस धीर पुरुष को ये इन्द्रियाँ और विषयों के संयोग व्याकुल नहीं करते, वह मोक्ष के योग्य होता है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.15
First: Sanskrit chanting
यं हि न व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते
🗣️ Hindi meaning
क्योंकि हे पुरुष श्रेष्ठ ! दुःख-सुख को समान समझने वाले जिस धीर पुरुष को ये इन्द्रियाँ और विषयों के संयोग व्याकुल नहीं करते, वह मोक्ष के योग्य होता है |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता कि... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.16 | 2_16 | 2 | 16 | karma | नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः
उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः | असत् वस्तु की तो सत्ता नहीं है और सत् का अभाव नहीं है। इस प्रकार इन दोनों को ही तत्त्वज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.16
First: Sanskrit chanting
नासतो विद्यते भावो नाभावो विद्यते सतः
उभयोरपि दृष्टोऽन्तस्त्वनयोस्तत्त्वदर्शिभिः
🗣️ Hindi meaning
असत् वस्तु की तो सत्ता नहीं है और सत् का अभाव नहीं है। इस प्रकार इन दोनों को ही तत्त्वज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.17 | 2_17 | 2 | 17 | karma | अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति | नाशरहित तो तू उसको जान, जिससे यह सम्पूर्ण जगत्-दृश्य वर्ग व्याप्त है। इस अविनाशी का विनाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.17
First: Sanskrit chanting
अविनाशि तु तद्विद्धि येन सर्वमिदं ततम्
विनाशमव्ययस्यास्य न कश्चित्कर्तुमर्हति
🗣️ Hindi meaning
नाशरहित तो तू उसको जान, जिससे यह सम्पूर्ण जगत्-दृश्य वर्ग व्याप्त है। इस अविनाशी का विनाश करने में कोई भी समर्थ नहीं है |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किय... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.18 | 2_18 | 2 | 18 | karma | अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः
अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत | इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्यस्वरूप जीवात्मा के सब शरीर नाशवानु कहे गये हैं। इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू युद्ध कर। | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.18
First: Sanskrit chanting
अन्तवन्त इमे देहा नित्यस्योक्ताः शरीरिणः
अनाशिनोऽप्रमेयस्य तस्माद्युध्यस्व भारत
🗣️ Hindi meaning
इस नाशरहित, अप्रमेय, नित्यस्वरूप जीवात्मा के सब शरीर नाशवानु कहे गये हैं। इसलिए हे भरतवंशी अर्जुन! तू युद्ध कर।
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.19 | 2_19 | 2 | 19 | karma | य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते | जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसको मारा मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते; क्योंकि यह आत्मा वास्तव में न तो किसी को मारता है और न किसी के द्वारा मारा जाता है। | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.19
First: Sanskrit chanting
य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम्
उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते
🗣️ Hindi meaning
जो इस आत्मा को मारने वाला समझता है तथा जो इसको मारा मानता है, वे दोनों ही नहीं जानते; क्योंकि यह आत्मा वास्तव में न तो किसी को मारता है और न किसी के द्वारा मारा जाता है।
🌱 Life less... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.20 | 2_20 | 2 | 20 | karma | न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे | यह आत्मा किसी काल में भी न तो जन्मता है और न मरता ही है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला ही है; क्योंकि यह अजन्मा, नित्य, सनातन और पुरातन है, शरीर के मारे जाने पर भी यह नहीं मारा जाता| | आत्मा अमर और अविनाशी है। शरीर के परिवर्तन से अपनी आंतरिक शक्ति और शांति को विचलित न होने दें। | 🎧 Verse 2.20
First: Sanskrit chanting
न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे
🗣️ Hindi meaning
यह आत्मा किसी काल में भी न तो जन्मता है और न मरता ही है तथा न यह उत्पन्न होकर फिर होने वाला ही है; क्योंकि यह अजन्मा, नित्य, सनातन और पुरातन है, शरीर के मार... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.21 | 2_21 | 2 | 21 | karma | वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम्
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम् | हे पुत्रपुत्र अर्जुन! जो पुरुष इस आत्मा को नाशरहित, नित्य, अजन्मा और अव्यय जानता है, वह पुरुष कैसे किसको मरवाता है और कैसे किसको मारता है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.21
First: Sanskrit chanting
वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम्
कथं स पुरुषः पार्थ कं घातयति हन्ति कम्
🗣️ Hindi meaning
हे पुत्रपुत्र अर्जुन! जो पुरुष इस आत्मा को नाशरहित, नित्य, अजन्मा और अव्यय जानता है, वह पुरुष कैसे किसको मरवाता है और कैसे किसको मारता है |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.22 | 2_22 | 2 | 22 | karma | वासांसि जीर्णानि यथा विहायनवानि गृह्णाति नरोऽपराणि
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-न्यन्यानि संयाति नवानि देही | जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर दूसरे नये वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्याग कर दूसरे नये शरीरों को प्राप्त होता है | | जैसे पुराने वस्त्र बदलकर नए धारण किए जाते हैं, वैसे ही बदलाव को स्वीकार करना जीवन का स्वाभाविक नियम है। | 🎧 Verse 2.22
First: Sanskrit chanting
वासांसि जीर्णानि यथा विहायनवानि गृह्णाति नरोऽपराणि
तथा शरीराणि विहाय जीर्णा-न्यन्यानि संयाति नवानि देही
🗣️ Hindi meaning
जैसे मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग कर दूसरे नये वस्त्रों को ग्रहण करता है, वैसे ही जीवात्मा पुराने शरीरों को त्याग कर दूसरे नये शरीरों को प्राप्त होता है |
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bhagavad-gita-lifelesson | 2.23 | 2_23 | 2 | 23 | karma | नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः | इस आत्मा को शस्त्रादि नहीं काट सकते, इसको आग नहीं जला सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकता| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.23
First: Sanskrit chanting
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः
🗣️ Hindi meaning
इस आत्मा को शस्त्रादि नहीं काट सकते, इसको आग नहीं जला सकती, इसको जल नहीं गला सकता और वायु नहीं सुखा सकता|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही ज... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.24 | 2_24 | 2 | 24 | karma | अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः | क्योंकि यह आत्मा अछेद्य है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेद्य और नि:सन्देह अशोष्य है तथा यह आत्मा नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर रहनेवाला और सनातन है| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.24
First: Sanskrit chanting
अच्छेद्योऽयमदाह्योऽयमक्लेद्योऽशोष्य एव च
नित्यः सर्वगतः स्थाणुरचलोऽयं सनातनः
🗣️ Hindi meaning
क्योंकि यह आत्मा अछेद्य है, यह आत्मा अदाह्य, अक्लेद्य और नि:सन्देह अशोष्य है तथा यह आत्मा नित्य, सर्वव्यापी, अचल, स्थिर रहनेवाला और सनातन है|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.25 | 2_25 | 2 | 25 | karma | अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते
तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि | यह आत्मा अव्यक्त है, यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है। इससे हे अर्जुन! इस आत्मा को उपयुक्त प्रकार से जानकर तू शोक करने के योग्य नहीं है अर्थात तुझे शोक करना उचित नहीं है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.25
First: Sanskrit chanting
अव्यक्तोऽयमचिन्त्योऽयमविकार्योऽयमुच्यते
तस्मादेवं विदित्वैनं नानुशोचितुमर्हसि
🗣️ Hindi meaning
यह आत्मा अव्यक्त है, यह आत्मा अचिन्त्य है और यह आत्मा विकाररहित कहा जाता है। इससे हे अर्जुन! इस आत्मा को उपयुक्त प्रकार से जानकर तू शोक करने के योग्य नहीं है अर्थात तुझे शोक करना उचित ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.26 | 2_26 | 2 | 26 | karma | अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्
तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि | किंतु यदि तू इस आत्मा को सदा जन्मने वाला तथा सदा मरनेवाला मानता हो, तो भी हे महाबाहो! तू इस प्रकार शोक करने को योग्य नहीं है | कोई एक महापुरुष ही इस आत्मा को आश्चर्य की भाँति देखता है और वैसे ही दूसरा कोई महापुरुष ही इसके तत्त्व का आश्चर्य की भाँति वर्णन करता है तथा दूसरा कोई अधिकारी पुरुष ही इसे आश्चर्य की भाँति सुनता... | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.26
First: Sanskrit chanting
अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम्
तथापि त्वं महाबाहो नैवं शोचितुमर्हसि
🗣️ Hindi meaning
किंतु यदि तू इस आत्मा को सदा जन्मने वाला तथा सदा मरनेवाला मानता हो, तो भी हे महाबाहो! तू इस प्रकार शोक करने को योग्य नहीं है | कोई एक महापुरुष ही इस आत्मा को आश्चर्य की भाँति देखता है ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.27 | 2_27 | 2 | 27 | karma | जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि | क्योंकि इस मान्यता के अनुसार जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इससे भी इस बिना उपाय वाले विषय में तू शोक करने के योग्य नहीं है| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.27
First: Sanskrit chanting
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि
🗣️ Hindi meaning
क्योंकि इस मान्यता के अनुसार जन्मे हुए की मृत्यु निश्चित है और मरे हुए का जन्म निश्चित है। इससे भी इस बिना उपाय वाले विषय में तू शोक करने के योग्य नहीं है|
🌱 Life lesson
परि... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.28 | 2_28 | 2 | 28 | karma | अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत
अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना | हे अर्जुन! सम्पूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट हो जाने वाले हैं; केवल बीच में प्रकट हैं; फिर ऐसी स्थिति में क्या शोक करना है?| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.28
First: Sanskrit chanting
अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत
अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना
🗣️ Hindi meaning
हे अर्जुन! सम्पूर्ण प्राणी जन्म से पहले अप्रकट थे और मरने के बाद भी अप्रकट हो जाने वाले हैं; केवल बीच में प्रकट हैं; फिर ऐसी स्थिति में क्या शोक करना है?|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.29 | 2_29 | 2 | 29 | karma | आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेन-माश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः
आश्चर्यवच्चैनमन्यः शृणोतिश्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् | कोई एक महापुरुष ही इस आत्मा को आश्चर्य की भाँति देखता है और वैसे ही दूसरा कोई महापुरुष ही इसके तत्त्व का आश्चर्य की भाँति वर्णन करता है तथा दूसरा कोई अधिकारी पुरुष ही इसे आश्चर्य की भाँति सुनता है। कोई-कोई तो सुनकर भी इसको नहीं जानता| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.29
First: Sanskrit chanting
आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेन-माश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः
आश्चर्यवच्चैनमन्यः शृणोतिश्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित्
🗣️ Hindi meaning
कोई एक महापुरुष ही इस आत्मा को आश्चर्य की भाँति देखता है और वैसे ही दूसरा कोई महापुरुष ही इसके तत्त्व का आश्चर्य की भाँति वर्णन करता है तथा दूसरा कोई ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.30 | 2_30 | 2 | 30 | karma | देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि | हे अर्जुन! यह आत्मा सब के शरीरों में सदा ही अवध्य है। इस कारण सम्पूर्ण प्राणियों के लिये तू शोक करने को योग्य नहीं है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.30
First: Sanskrit chanting
देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि
🗣️ Hindi meaning
हे अर्जुन! यह आत्मा सब के शरीरों में सदा ही अवध्य है। इस कारण सम्पूर्ण प्राणियों के लिये तू शोक करने को योग्य नहीं है |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किय... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.31 | 2_31 | 2 | 31 | karma | स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि
धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते | तथा अपने धर्म को देखकर भी तू भय करने योग्य नहीं है यानी तुझे भय नहीं करना चाहिये; क्योंकि क्षत्रिय के लिये धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर दूसरा कोई कल्याणकारी कर्तव्य नहीं है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.31
First: Sanskrit chanting
स्वधर्ममपि चावेक्ष्य न विकम्पितुमर्हसि
धर्म्याद्धि युद्धाच्छ्रेयोऽन्यत्क्षत्रियस्य न विद्यते
🗣️ Hindi meaning
तथा अपने धर्म को देखकर भी तू भय करने योग्य नहीं है यानी तुझे भय नहीं करना चाहिये; क्योंकि क्षत्रिय के लिये धर्मयुक्त युद्ध से बढ़कर दूसरा कोई कल्याणकारी कर्तव्य नहीं है ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.32 | 2_32 | 2 | 32 | karma | यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम्
सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम् | हे पार्थ! अपने-आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार रूप इस प्रकार के युद्ध को भाग्यवान क्षत्रिय लोग ही पाते हैं| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.32
First: Sanskrit chanting
यदृच्छया चोपपन्नं स्वर्गद्वारमपावृतम्
सुखिनः क्षत्रियाः पार्थ लभन्ते युद्धमीदृशम्
🗣️ Hindi meaning
हे पार्थ! अपने-आप प्राप्त हुए और खुले हुए स्वर्ग के द्वार रूप इस प्रकार के युद्ध को भाग्यवान क्षत्रिय लोग ही पाते हैं|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से कि... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.33 | 2_33 | 2 | 33 | karma | अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि
ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि | किंतु यदि तू इस धर्म युक्त युद्ध को नहीं करेगा तो स्वधर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होगा| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.33
First: Sanskrit chanting
अथ चेत्त्वमिमं धर्म्यं संग्रामं न करिष्यसि
ततः स्वधर्मं कीर्तिं च हित्वा पापमवाप्स्यसि
🗣️ Hindi meaning
किंतु यदि तू इस धर्म युक्त युद्ध को नहीं करेगा तो स्वधर्म और कीर्ति को खोकर पाप को प्राप्त होगा|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जी... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.34 | 2_34 | 2 | 34 | karma | अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्
सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते | तथा सब लोग तेरी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति का भी कथन करेंगे और माननीय पुरुष के लिये अपकीर्ति मरण से भी बढ़कर है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.34
First: Sanskrit chanting
अकीर्तिं चापि भूतानि कथयिष्यन्ति तेऽव्ययाम्
सम्भावितस्य चाकीर्तिर्मरणादतिरिच्यते
🗣️ Hindi meaning
तथा सब लोग तेरी बहुत काल तक रहने वाली अपकीर्ति का भी कथन करेंगे और माननीय पुरुष के लिये अपकीर्ति मरण से भी बढ़कर है |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.35 | 2_35 | 2 | 35 | karma | भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम् | और जिनकी दृष्टि में तू पहले बहुत सम्मानित होकर अब लघुता को प्राप्त होगा, वे महारथी लोग तुझे भय के कारण युद्ध से हटा हुआ मानेंगे | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.35
First: Sanskrit chanting
भयाद्रणादुपरतं मंस्यन्ते त्वां महारथाः
येषां च त्वं बहुमतो भूत्वा यास्यसि लाघवम्
🗣️ Hindi meaning
और जिनकी दृष्टि में तू पहले बहुत सम्मानित होकर अब लघुता को प्राप्त होगा, वे महारथी लोग तुझे भय के कारण युद्ध से हटा हुआ मानेंगे |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बु... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.36 | 2_36 | 2 | 36 | karma | अवाच्यवादांश्च बहून्वदिष्यन्ति तवाहिताः
निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम् | तेरे वैरी लोग तेरे सामर्थ्य की निन्दा करते हुए तुझे बहुत-से न कहने योग्य वचन भी कहेंगे; उससे अधिक दुःख और क्या होगा| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.36
First: Sanskrit chanting
अवाच्यवादांश्च बहून्वदिष्यन्ति तवाहिताः
निन्दन्तस्तव सामर्थ्यं ततो दुःखतरं नु किम्
🗣️ Hindi meaning
तेरे वैरी लोग तेरे सामर्थ्य की निन्दा करते हुए तुझे बहुत-से न कहने योग्य वचन भी कहेंगे; उससे अधिक दुःख और क्या होगा|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किय... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.37 | 2_37 | 2 | 37 | karma | हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः | या तो तू युद्ध में मारा जाकर स्वर्ग को प्राप्त होगा अथवा संग्राम में जीतकर पृथ्वी का राज्य भोगेगा। इस कारण हे अर्जुन! तू युद्ध के लिये निश्चय करके खड़ा हो जा| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.37
First: Sanskrit chanting
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्
तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः
🗣️ Hindi meaning
या तो तू युद्ध में मारा जाकर स्वर्ग को प्राप्त होगा अथवा संग्राम में जीतकर पृथ्वी का राज्य भोगेगा। इस कारण हे अर्जुन! तू युद्ध के लिये निश्चय करके खड़ा हो जा|
🌱 Life... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.38 | 2_38 | 2 | 38 | karma | सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि | जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुःख को समान समझ कर, उसके बाद युद्ध के लिये तैयार हो जा; इस प्रकार युद्ध करने से तू पाप को नहीं प्राप्त होगा | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.38
First: Sanskrit chanting
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि
🗣️ Hindi meaning
जय-पराजय, लाभ-हानि और सुख-दुःख को समान समझ कर, उसके बाद युद्ध के लिये तैयार हो जा; इस प्रकार युद्ध करने से तू पाप को नहीं प्राप्त होगा |
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.39 | 2_39 | 2 | 39 | karma | एषा तेऽभिहिता साङ्ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु
बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि | हे पार्थ! यह बुद्धि तेरे लिये ज्ञान योग के विषय में कही गयी और अब तू इसको कर्मयोग के विषय में सुन कि जिस बुद्धि से युक्त हुआ तू कर्मों के बन्धन को भलीभाँति त्याग देगा यानि सर्वथा नष्ट कर डालेगा | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.39
First: Sanskrit chanting
एषा तेऽभिहिता साङ्ख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु
बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि
🗣️ Hindi meaning
हे पार्थ! यह बुद्धि तेरे लिये ज्ञान योग के विषय में कही गयी और अब तू इसको कर्मयोग के विषय में सुन कि जिस बुद्धि से युक्त हुआ तू कर्मों के बन्धन को भलीभाँति त्याग देगा... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.40 | 2_40 | 2 | 40 | karma | नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् | इस कर्मयोग में आरम्भ का अर्थात् बीज का नाश नहीं है और उलटा फलस्वरूप दोष भी नहीं है; बल्कि इस कर्मयोग रूप धर्म का थोड़ा सा भी साधन जन्म-रूप महान् भय से रक्षा कर लेता है | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.40
First: Sanskrit chanting
नेहाभिक्रमनाशोऽस्ति प्रत्यवायो न विद्यते
स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात्
🗣️ Hindi meaning
इस कर्मयोग में आरम्भ का अर्थात् बीज का नाश नहीं है और उलटा फलस्वरूप दोष भी नहीं है; बल्कि इस कर्मयोग रूप धर्म का थोड़ा सा भी साधन जन्म-रूप महान् भय से रक्षा कर लेता है |
🌱 Life l... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.41 | 2_41 | 2 | 41 | karma | व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन
बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम् | हे अर्जुन ! इस कर्मयोग में निश्चयात्मिका बुद्धि एक ही होती है; किंतु अस्थिर विचार वाले विवेकहीन सकाम मनुष्यों की बुद्धियाँ निश्चय ही बहुत भेदोंवाली और अनन्त होती हैं | | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.41
First: Sanskrit chanting
व्यवसायात्मिका बुद्धिरेकेह कुरुनन्दन
बहुशाखा ह्यनन्ताश्च बुद्धयोऽव्यवसायिनाम्
🗣️ Hindi meaning
हे अर्जुन ! इस कर्मयोग में निश्चयात्मिका बुद्धि एक ही होती है; किंतु अस्थिर विचार वाले विवेकहीन सकाम मनुष्यों की बुद्धियाँ निश्चय ही बहुत भेदोंवाली और अनन्त होती हैं |
🌱 Life lesson
... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.42 | 2_42 | 2 | 42 | karma | यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः | हे अर्जुन! जो अविवेकीजन वेदों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं मानते, वे वेदों की पुष्पित वाणी को कहते हैं।| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.42
First: Sanskrit chanting
यामिमां पुष्पितां वाचं प्रवदन्त्यविपश्चितः
वेदवादरताः पार्थ नान्यदस्तीति वादिनः
🗣️ Hindi meaning
हे अर्जुन! जो अविवेकीजन वेदों के अतिरिक्त कुछ भी नहीं मानते, वे वेदों की पुष्पित वाणी को कहते हैं।|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन म... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.43 | 2_43 | 2 | 43 | karma | कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्
क्रियाविशेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति | ऐसे कामात्मा लोग स्वर्ग और जन्मकर्म के फलों के पीछे पड़े रहते हैं। वे अनेक प्रकार के कर्मों में लगे रहते हैं और भोगों और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करते हैं।| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.43
First: Sanskrit chanting
कामात्मानः स्वर्गपरा जन्मकर्मफलप्रदाम्
क्रियाविशेषबहुलां भोगैश्वर्यगतिं प्रति
🗣️ Hindi meaning
ऐसे कामात्मा लोग स्वर्ग और जन्मकर्म के फलों के पीछे पड़े रहते हैं। वे अनेक प्रकार के कर्मों में लगे रहते हैं और भोगों और ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करते हैं।|
🌱 Life lesson
प... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.44 | 2_44 | 2 | 44 | karma | भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम्
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते | भोग और ऐश्वर्य में अत्यन्त आसक्त उन पुरुषों की परमात्मा में निश्चयात्मक बुद्धि नहीं होती।| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.44
First: Sanskrit chanting
भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम्
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ न विधीयते
🗣️ Hindi meaning
भोग और ऐश्वर्य में अत्यन्त आसक्त उन पुरुषों की परमात्मा में निश्चयात्मक बुद्धि नहीं होती।|
🌱 Life lesson
परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और ... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.45 | 2_45 | 2 | 45 | karma | त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान् | हे अर्जुन ! वेद उपयुक्त प्रकार से तीनों गुणों के कार्यरूप समस्त भोगों एवं उनके साधनों का प्रतिपादन करने वाले हैं; इसलिए तू उन भोगों एवं उनके साधनों, आसक्तिहीन, हर्ष-शोकादि द्वन्द्वों से रहित, नित्यवस्तु परमात्मा में स्थित योगक्षेमकों न चाहने वाला और स्वाधीन अन्तःकरणवाला हो। | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.45
First: Sanskrit chanting
त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन
निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्
🗣️ Hindi meaning
हे अर्जुन ! वेद उपयुक्त प्रकार से तीनों गुणों के कार्यरूप समस्त भोगों एवं उनके साधनों का प्रतिपादन करने वाले हैं; इसलिए तू उन भोगों एवं उनके साधनों, आसक्तिहीन, हर्ष-श... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.46 | 2_46 | 2 | 46 | karma | यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके
तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः | सब ओर से परिपूर्ण जलाशय के प्राप्त हो जाने पर छोटे जलाशय में मनुष्य का जितना प्रयोजन रहता है, ब्रह्म को तत्व से जानने वाले ब्राह्मण का समस्त वेदों में उतना ही प्रयोजन रह जाता है| | परिणामों की चिंता किए बिना समत्व बुद्धि से किया गया कर्म ही जीवन में संतुलन और मुक्ति लाता है। | 🎧 Verse 2.46
First: Sanskrit chanting
यावानर्थ उदपाने सर्वतः सम्प्लुतोदके
तावान्सर्वेषु वेदेषु ब्राह्मणस्य विजानतः
🗣️ Hindi meaning
सब ओर से परिपूर्ण जलाशय के प्राप्त हो जाने पर छोटे जलाशय में मनुष्य का जितना प्रयोजन रहता है, ब्रह्म को तत्व से जानने वाले ब्राह्मण का समस्त वेदों में उतना ही प्रयोजन रह जाता है|
🌱 Li... |
bhagavad-gita-lifelesson | 2.47 | 2_47 | 2 | 47 | karma | कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि | तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो| | कर्म और प्रयास आपके नियंत्रण में हैं, परिणाम नहीं। फल की चिंता छोड़कर वर्तमान कार्य में पूर्ण समर्पण रखें, तनाव समाप्त होगा और आंतरिक शांति मिलेगी। | 🎧 Verse 2.47
First: Sanskrit chanting
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि
🗣️ Hindi meaning
तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो|
🌱 Life lesson
कर्म और प्रयास आपके नियंत्रण में ह... |
End of preview. Expand in Data Studio
bhagavad-gita-lifelesson Dataset
A complete, high-fidelity dataset covering all 701 verses of the Bhagavad Gita titled bhagavad-gita-lifelesson. Each verse follows the strict format:
- First: Sanskrit chanting
- Then: Hindi meaning (हिन्दी अर्थ)
- Then: Life lesson (जीवन-पाठ)
(Transliteration and English translation have been removed).
🎧 Example Representation (Verse 2.47)
🎧 Verse 2.47
First: Sanskrit chanting
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि
🗣️ Hindi meaning
तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए तू कर्मों के फल का हेतु मत हो तथा तेरी कर्म न करने में भी आसक्ति न हो|
🌱 Life lesson
कर्म और प्रयास आपके नियंत्रण में हैं, परिणाम नहीं। फल की चिंता छोड़कर वर्तमान कार्य में पूर्ण समर्पण रखें, तनाव समाप्त होगा और आंतरिक शांति मिलेगी।
📁 Available Formats in this Directory
| File | Format | Description | Best For |
|---|---|---|---|
bhagavad-gita-lifelesson.json |
JSON Array | Complete dataset with all 701 verses | Web apps, REST APIs, Node.js |
bhagavad-gita-lifelesson.jsonl |
JSON Lines | One verse per line | PyTorch DataLoader, Hugging Face datasets |
bhagavad-gita-lifelesson.csv |
CSV (UTF-8) | Comma-separated table | Pandas, Excel, R, Google Sheets |
hindi_explanations_map.json |
JSON Object | Key-value lookup dictionary keyed by chapter_verse (e.g. "2_47") |
Fast $O(1)$ Python/JS mapping |
build_huggingface_dataset.py |
Python Script | Script to merge JDhruv14/Bhagavad-Gita_Audio with Hindi life lessons |
Creating & publishing to Hugging Face Hub |
quickstart.py |
Python Script | Interactive Python demo script | Quick experimentation |
📋 Schema Definition
Each record in bhagavad-gita-lifelesson contains the following fields:
{
dataset: "bhagavad-gita-lifelesson"; // Dataset identifier
verse_id: string; // e.g. "2.47"
shloka_id: string; // e.g. "2_47" (maps 1-to-1 with audio)
chapter: number; // 1 to 18
verse: number; // 1 to 78
yoga_path: string; // "karma" | "bhakti" | "jnana"
sanskrit: string; // 1. Sacred Sanskrit chanting text in Devanagari
hindi_meaning: string; // 2. Direct Hindi meaning / anuvad
life_lesson: string; // 3. Actionable life lesson & wisdom for daily life
formatted_card: string; // Formatted shloka chant, meaning & lesson card
}
🚀 Quick Start (Python)
1. Load Pre-compiled Dataset Directly (No heavy download needed)
import json
with open("dataset/bhagavad-gita-lifelesson.json", "r", encoding="utf-8") as f:
gita_data = json.load(f)
# Find Verse 2.47
verse = next(v for v in gita_data if v["verse_id"] == "2.47")
print(verse["formatted_card"])
print(f"Life Lesson: {verse['life_lesson']}")
2. Load with Hugging Face datasets Library
from datasets import load_dataset
# Load from local JSONL
ds = load_dataset("json", data_files="dataset/bhagavad-gita-lifelesson.jsonl", split="train")
print(ds[46]["formatted_card"])
3. Stream Audio Directly from Hugging Face without Downloading 3.5GB
from datasets import load_dataset
import json
# 1. Load the Hindi explanations & life lessons map
with open("dataset/hindi_explanations_map.json", "r", encoding="utf-8") as f:
hindi_map = json.load(f)
# 2. Stream audio from Hugging Face on the fly
audio_ds = load_dataset("JDhruv14/Bhagavad-Gita_Audio", split="train", streaming=True)
# 3. Iterate or inspect any verse
for item in audio_ds:
shloka_id = item["shloka_id"] # e.g. "2_47"
if shloka_id == "2_47":
audio_data = item["audio"] # {'array': ..., 'sampling_rate': 44100}
hindi_info = hindi_map.get(shloka_id, {})
print(f"🎧 Verse: {hindi_info['verse_id']}")
print(f"Sanskrit:\n{item['sanskrit']}\n")
print(f"🗣️ Hindi Life Lesson:\n{hindi_info['life_lesson']}")
print(f"Sampling Rate: {audio_data['sampling_rate']} Hz")
break
🛠️ Build Full Multimodal Hugging Face Dataset & Push to Hub
To create a merged Hugging Face dataset containing the actual audio files bundled with the Hindi life lessons:
# Install dependencies
pip install datasets soundfile
# Run the build script to create a local dataset
python dataset/build_huggingface_dataset.py --save-dir bhagavad-gita-lifelesson
# Or push directly to your Hugging Face Hub account:
huggingface-cli login
python dataset/build_huggingface_dataset.py --push-to-hub --repo-id your-username/bhagavad-gita-lifelesson
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